तुलसी एवं सूर्य दोनों ही साक्षात् देवी एवं देवता मानव कल्याण के लिए ईश्वर का हमें आशीर्वाद हैं। भारतीय संस्कृति में इनकी अपार कांति एवं महत्वपूर्णता है।

जिस घर में तुलसी माता हरी भरी हों और पूजी जाती हों और जिस घर के सदस्य नित्य सूर्य देव को जल देतें हों उस घर में विपदा भी आने में डरती है।

ज्योत‌िषशास्‍त्र में सूर्य को आत्मा का कारक बताया गया है। न‌ियम‌ित सूर्य को जल देने से आत्म शुद्ध‌ि और आत्मबल प्राप्त होता है। सूर्य को जल देने से आरोग्य लाभ म‌िलता है।

सूर्य देव को जल देने के कोई कठिन नियम नहीं हैं। निम्नलिखित सात सरल नियम एवं श्रद्धा के साथ  दिया हुआ अर्घ तन-मन-धन तीनो को पुष्ट करता है।

१. सूर्य को स्नान के बाद तांबे के बर्तन से जल अर्प‌ित करें। सूर्य को जल देना का सबसे अच्छा और सही समय सूर्य उदय से लेकर उसके 1 घंटे बाद तक का माना जाता है|

२. जल हमेशा पूर्व दिशा मे देना चाहिए और साथ में सूर्य मंत्र का जाप करना चाहिए (ॐ सूर्याय नमः, ॐ भास्कराय नमः, ॐ घृणि सूर्याय नमः)

३. जल में गंगाजल, चावल, रोली, फूल पत्तियां आदि डालकर चढ़ाना चाहिए

४ .जल की धारा को रोक-रोक कर 7 बार जल दें। इसके साथ 7 बार सूर्य के मंत्र भी जप करें तो व‌िशेष लाभप्रद रहता है।

५. लोटे में आखिरी में एक घूँट जल बचा कर दाहिने अंजुली में ले कर पी लेना चाहिए

६. हो सके तो जल घाँस या पौधे को दें ताकि उसका उपयोग हो सके और वो किसी  के पैरों के नीचे न आये।

७. मिटटी में गिरे जल को माथे से लगा कर धरती माँ और पिता सूर्य से आशीर्वाद ले कर दिन का  शुभारम्भ करें।

सूर्य को पिता मान इस अर्घ्यदान से हमारी मनोकामनाओ की पूर्ती होती है। नियमित अर्घ्यदान से आयु, आँखों की रौशनी, कार्य शैली एवं समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है।