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भगवद गीता के 6 सबसे लोकप्रिय श्लोक

भारत की संस्कृति में भगवद गीता न केवल पूज्यनीय है बल्कि अनुकरण करने योग्य है| यह महाभारत के युद्ध के दौरान श्री कृष्णा द्वारा अर्जुन को दिया हुआ जीवन का सत्य है, जो कि शाश्वत है | आज भी अगर गीता के कुछ अभिन्न श्लोकों को इंसान ठीक से समझ कर अपने जीवन में उतार ले, तो वह अपनी कितनी ही परेशानियों को आसानी से हल कर सकता है |

प्रस्तुत हैं श्री गीता के 6 चुनिन्दा श्लोक जो आपका जीवन बदल सकतें है | यह सभी श्लोक श्री कृष्णा भगवान् के मुख से निकले है और अत्यंत पूजनीय और विचारणीय है |

1. यदा, यदा, हि, धर्मस्य, ग्लानिः, भवति, भारत,
अभ्युत्थानम्, अधर्मस्य, तदा, आत्मानम्, सृजामिहम्।।

(अध्याय 4 पद 7)




जब जब धर्म की हानि होती है और अधर्म में वृद्धि होती है, तब तब मैं अवतार लेता हूँ ।।

2. परित्राणाय, साधूनाम्, विनाशाय, च, दुष्कृृताम्,
धर्मसंस्थापनार्थाय, सम्भवामि, युगे, युगे।।

(अध्याय 4 पद 8)

साधु लोगों का उद्धार करने के लिये और बुरे कर्म करने वाले लोगों का विनाश करने के लिये और धर्म की संस्थापना करने के लिए, मैं युग – युग में अवतरित होता हूं ।।

3. कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन,
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।

(अध्याय 2 पद 47)




तुम्हें अपने निर्धारित कर्तव्य का पालन करने का अधिकार है, लेकिन तुम कर्मों के फल के हकदार नहीं हो। इसलिये तुम कर्मों के फल हेतु  मत करो तथा तुम्हारी कर्म करने में भी आसक्ति न हो।।

4. न जायते, म्रियते, वा कदाचित् न अयम्, भूत्वा, भविता वा न, भूयः
अजः नित्यः शाश्वतः अयम्, पुराणः न, हन्यते, हन्यमाने, शरीरे।।

(अध्याय 2 पद 20)

आत्मा ना पैदा होती है और न ही मरती है। आत्मा न उत्पन्न होकर फिर होने वाली ही है, क्योंकि आत्मा अजन्मा, नित्य, शाश्वतः, सनातन और पुरातन है। शरीर के मारे जाने पर भी आत्मा नहीं मरती ।।

5. वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णतिः, नरः अपराणि,
तथा शरीराणि विहाय जीर्णानि, अन्यानि संयाति, नवानि, देही।।

(अध्याय 2 पद 22)




एक इंसान जैसे पुराने वस्त्रों को त्यागकर नये वस्त्रों को ग्रहण करता है वैसे ही जीवात्मा पुराने जीर्ण शरीर को त्याग कर नये शरीर को प्राप्त होती है।।

6. नैनं छिन्दन्ति, शस्त्राणि, नैनं दहति, पावकः,
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।।

(अध्याय 2 पद 23)

न आत्मा को कोई शास्त्र छेद करता है, और न ही आत्मा को आग जला सकती है ,न आत्मा को जल गला सकती है और न ही वायु आत्मा को सुखा सकती है।।

 

गीता के श्लोक न केवल वैज्ञानिक हैं बल्कि शरीर, आत्मा, श्रृष्टि के नियम सभी के बारे में ऐसा ज्ञान है जो आज के वैज्ञानिक शोध कर के सिद्ध कर रहे है | इनके चिंतन मनन से हम एक परिपूर्ण जीवन को जीने की प्रेरणा ले सकतें है |

 

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