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मंदिर

घर के मंदिर में रखें इन चीज़ों का ध्यान

मारे भारत देश में,  मंदिर की, एक खास जगह होती है। जिस घर में मंदिर नहीं होता, वो घर अधूरा माना जाता है। घर में मंदिर, घर के सदस्यों को पूजा-अर्चना के लिए एक निर्धारित जगह देता है। मंदिर की ऊर्जा बाक़ी कमरों की ऊर्जा से अलग और उच्च होती है। घर का कोई सदस्य यदि परेशान हो, और वो अपनी परेशानी इश्वर को समर्पित कर, घर के मंदिर में थोड़ी देर ध्यान करे, तो उसकी परेशानी हल्की हो जाती है, ऐसा हजारों लोगों का अनुभव है।




मंदिर की ऊर्जा बढ़ाने के लिए हम मूर्ति स्थापना करते हैं, धूप-दीप जलाते हैं, आरती, भजन, पाठ, जप और ध्यान करते हैं। घर का मंदिर चाहे छोटा हो या बड़ा, हमारे पूर्वज एवं गुरु-जन घर में स्थापित मंदिर के लिए कुछ नियम बता के गए है। इन बातों का आपके घर की सुख समृद्धि से सीधा नाता है इसलिए आवश्यक है कि हम इन बातों का अपने घर के मंदिर में ध्यान रखें।

#1 मंदिर का स्थान

वास्तु के अनुसार मंदिर का सर्वोच्च स्थान घर के इशान कोण यानि उत्तर पूरब दिशा में है। उसके उपरांत मंदिर के लिए उत्तर और पूरब दिशा अत्यंत शुभ दिशा है। इन दिशाओं से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और मंदिर इन दिशाओं में होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा की बढ़ोतरी होती है।

#2 मंदिर की दिशा

मंदिर में बैठते समय हमारा मुख उत्तर पूरब, उत्तर या पूरब दिशा की ओर होना चाहिए। ऐसे में हम इन दिशाओं की सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण करतें है।

#3 मंदिर की देहरी हो ऊंची

मंदिर की देहरी को घर के फर्श से थोडा ऊँचा बनाना चाहिए। इससे मंदिर की ऊर्जा मंदिर में ही रहती है और इधर उधर बह कर नष्ट नहीं होती।

#4 मंदिर हो रोशनदार एवं हवादार

मंदिर रोशनदार एवं हवादार होना चाहिए। मंदिर में सुबह के सूर्य का प्रकाश की आने की व्यवस्था बनानी चाहिए। हवा के लिए मंदिर की खिड़कियाँ खुली हों अन्यथा पंखे की व्यवस्था होनी चाहिए।

#5 मंदिर के समीप न हो शौचालय

मंदिर के समीप शौचालय नहीं होना चाहिए। यह एक प्रबल वास्तुदोष होता हैं। इससे मंदिर की ऊर्जा नष्ट होती है और घर का केंद्र बिंदु ध्वस्त हो जाता है।

#6 मंदिर न बनाएँ रसोईघर या शयनकक्ष में

मंदिर रसोईघर, एवं शयनकक्ष (बेडरूम)  में नहीं बनाना चाहिए। अगर मंदिर ड्राइंग रूम में है तो मेहमानों को आपके मंदिर की मूर्तिया नहीं दिखनी चाहिए। इसके लिए आप परदे या लकड़ी के पार्टीशन का उपयोग करें।

#7 मंदिर में रोज़ हो पूजा

यदि मंदिर होने पर भी वहां नित्य पूजा न की जाए तो ऐसा मंदिर घर के निवासियों के लिए दोषकारक होता हैं। मंदिर में सभी नहीं तो कोई एक सदस्य निष्ठा पूर्वक नित्य सुबह और सांयकाल पूजा, जप, ध्यान आदि करे।



#8 मंदिर को रखें साफ़ सुथरा

मंदिर साफ़ सुथरा और शोर गुल से दूर होना चाहिए। यदि मंदिर में बैठे साधन का बाहरी कारण से ध्यान भटके तो ऐसा मंदिर में वास्तु दोष न होते हुए भी दोष उत्पन्न हो जाता है।

#9 मंदिर में ऐसे रखें मूर्तियाँ

घर के मंदिर में भगवान की मूर्तियाँ सटा कर नहीं रखनी चाहिए। दो मूर्तियों के बीच कम से कम १-२ इंच का फ़ासला रखना चाहिए। दो मूर्तियों को एक दूसरे को देखते हुए नहीं रखना चाहिए और न ही एक दूसरे के पीछे रखना चाहिए।

#10 मंदिर में क्या न रखें

मंदिर में खंडित मूर्ति, दीपक, बर्तन इत्यादि नहीं होने चाहिए। ये एक प्रकार का वास्तु दोष है। खंडित मूर्ति इत्यादि को तुरंत प्रवाह कर देना चाहिए।

#11 मंदिर में आसन

अगर घर के सदस्य साधना करते है तो सभी साधक के अलग आसन होने चाहिए। साधना के बाद आसन तह लगा कर अलग रख देना चाहिए।

#12 मंदिर में हो सकारात्मक ऊर्जा

मंदिर को सुबह शाम दीपक, धूप, अगरबत्ती की खुशबू एवं  मन्त्रों  की ध्वनि से परिपूर्ण रखना चाहिए।

#13 मंदिर का दरवाज़ा न रखें बाहर से बंद

मंदिर के दरवाज़े में कभी भी बहार से कुण्डी नहीं लगानी चाहिए। बंद कमरे में नकारात्मक ऊर्जा का जन्म होता है। घर के सभी कमरे भी खुले ही रखने चाहियें।

#14 मंदिर में जलाएं अखंड दीप

साल में दोनों नवरात्रि में मंदिर में देसी घी का अखंड दीप जलना चाहिए। इस उपाय से साल भर के लिए घर से सभी वास्तु दोष नष्ट हो जाते है।

#15 मंदिर को कैसे करें साफ़

मंदिर के फर्श को बीच बीच में गौमूत्र अथवा गंगाजल से साफ़ करना चाहिए। इससे मंदिर की ऊर्जा बढती है।

 

मंदिर घर का केंद्र बिंदु होता है। अगर आप अपने मंदिर को उर्जित रखतें है तो आपका पूरा घर अपने आप ऊर्जा और खुशहाली से भर जाएगा। समस्याएं और बुरी नज़र आपके घर के आस पास भी नहीं आएँगी। अपने परिवार के सुख समृद्धि के लिए रखिये इन बातों का ख्याल!

 

 

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